आज के इस लेख में हम बात करने जा रहे 20 मार्च में आए सभी प्रमुख करेंट अफेयर्स के बारे में ये करेंट अफेयर्स यूपीएससी, एसएससी और अन्य राज्य स्तर के इग्जाम के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है।
भारतीय शेयर बाज़ार में 3% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
• यह गिरावट जून 2024 के बाद सबसे खराब दिन रहा, जब बाज़ार में 5% से अधिक गिरावट आई थी।
• यह 2021 के बाद पाँचवीं बार है जब बेंचमार्क सूचकांक 3% से अधिक गिरा है।
गिरावट के मुख्य कारण:
➤ कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी:
ब्रेंट क्रूड की कीमत $114 प्रति बैरल तक पहुँच गई।
➤ रुपये में कमजोरी:
रुपया गिरकर ₹92.89 प्रति डॉलर के नए निचले स्तर पर पहुँच गया।
➤ पश्चिम एशिया में तनाव:
इज़राइल ने ईरान के सबसे बड़े गैस फील्ड पर हमला किया।
➤ ईरान की जवाबी कार्रवाई:
ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा स्थलों पर हमला किया, जिससे ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा बढ़ा और तेल की कीमतें और बढ़ गईं।
➤ अमेरिकी फेडरल रिजर्व का प्रभाव:
फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें 3.5% से 3.75% के बीच स्थिर रखीं और संकेत दिया कि उच्च मुद्रास्फीति बनी रह सकती है, इसलिए 2026 में रेट कट्स की संभावना कम है।
➤ उच्च ब्याज दरों का असर:
अमेरिकी बाज़ार अधिक आकर्षक होने से भारत से निवेश की निकासी (Capital Outflow) बढ़ रही है।
जल जीवन मिश्न
संसदीय समिति ने कहा है कि ₹8.69 लाख करोड़ के जल जीवन मिशन (JJM) के उद्देश्य पूरे नहीं हो पाएंगे, यदि जल स्रोतों की स्थिरता सुनिश्चित नहीं की गई।
मुख्य समस्या:
• कई जगहों पर नल (Taps) लगाए गए हैं, लेकिन जल स्रोतों की कमी के कारण पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
• कुछ स्थानों पर जल स्रोत 1–2 वर्षों में ही समाप्त हो रहे हैं।
जल स्रोतों में शामिल हैं:
• नदियाँ
• झीलें
• तालाब
• अन्य प्राकृतिक जल स्रोत
समिति की सिफारिश:
समिति ने मंत्रालय को सुझाव दिया है कि “Source to Tap” योजना लागू की जाए।
इसका मतलब है कि केवल नल लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पर्याप्त और स्थायी जल स्रोत उपलब्ध हों, यह सुनिश्चित करना भी बहुत महत्वपूर्ण है।
योजना का विस्तार:
• केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन (JJM) को 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दी है।
मंत्रालय के अनुसार:
• अब ध्यान केवल इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण से हटाकर सेवा वितरण (Service Delivery) पर केंद्रित किया जाएगा।
नई डिजिटल प्रणाली:
• एक राष्ट्रीय डिजिटल प्रणाली “Sujalam Bharat” लागू की जाएगी।
• हर गाँव को एक यूनिक Sujal Gaon / Service Area ID दी जाएगी।
• पूरी जल आपूर्ति प्रणाली को डिजिटल रूप में मैप किया जाएगा।
भारत में टीबी (Tuberculosis) की स्थिति और चुनौतियाँ
• भारत में टीबी का बोझ:
भारत में दुनिया के लगभग 25% से अधिक टीबी मामलों का भार है।
• 2024 के आँकड़े (WHO Global TB Report):
लगभग 27 लाख नए टीबी मामले सामने आए और 3 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु हुई।
• 2015 से 2024 तक प्रगति:
इस अवधि में टीबी मामलों में 21% की कमी आई है, जो कि वैश्विक गिरावट से लगभग दोगुनी है।
• 2024 में मरीजों का वितरण:
• 54% पुरुष
• 35% महिलाएँ
• 11% बच्चे और किशोर
• महिलाओं पर असमान प्रभाव:
डेटा पूरी स्थिति नहीं बताता। मामलों की संख्या कम दिखने के बावजूद भी महिलाओं को अधिक सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
महिलाओं के सामने प्रमुख चुनौतियाँ:
• पर्याप्त पोषण की कमी
• आर्थिक संसाधनों तक सीमित पहुँच
• सामाजिक अलगाव का डर
• इलाज लेने में झिझक
• एक्स्ट्रा-पल्मोनरी टीबी (EPTB):
यह फेफड़ों के बाहर होने वाली टीबी है। यह आमतौर पर संक्रामक नहीं होती, लेकिन गंभीर हो सकती है।
संभावित लक्षण:
• बांझपन (Subfertility)
• मासिक धर्म में गड़बड़ी
• सरकारी पहल:
2019 में जेंडर-रेस्पॉन्सिव फ्रेमवर्क बनाया गया, जिसे आगे बढ़ाकर 2024 में “TB Mukt Bharat Abhiyaan” के तहत लागू किया जा रहा है।
शीर्षक: महाड़ सत्याग्रह (चावदार तालाब सत्याग्रह) – 99 वर्ष पूरे
• 20 मार्च 1927 को हुए महाड़ सत्याग्रह के 99 वर्ष पूरे हो गए हैं। यह आंदोलन सामाजिक समानता और दलित अधिकारों के लिए एक ऐतिहासिक घटना माना जाता है।
• महाड़ सत्याग्रह, जिसे चावदार तालाब (झील) सत्याग्रह भी कहा जाता है, का नेतृत्व डॉ. भीमराव अंबेडकर ने 20 मार्च 1927 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के महाड़ में किया था।
• उद्देश्य:
अछूत (दलित) समुदाय को सार्वजनिक टैंक/तालाब से पानी उपयोग करने का अधिकार दिलाना।
• पृष्ठभूमि:
उस समय भारतीय समाज में दलितों को सामाजिक रूप से अलग-थलग रखा जाता था और उन्हें उन सार्वजनिक जल स्रोतों का उपयोग करने से रोका जाता था, जिनका उपयोग अन्य हिंदू जातियाँ करती थीं।
• अगस्त 1923 का प्रस्ताव:
बॉम्बे विधान परिषद ने एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें दलित वर्गों को सरकार द्वारा संचालित स्थानों का उपयोग करने की अनुमति दी गई।
लेकिन इसे उच्च जातियों के विरोध का सामना करना पड़ा।
इस प्रस्ताव को राज बहादुर एस. के. बोले ने प्रस्तुत किया था, जिसे “बोले रेज़ोल्यूशन” कहा जाता है।
• 1927 में सत्याग्रह की शुरुआत:
डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने महाड़ में सत्याग्रह शुरू किया और चावदार तालाब से पानी पीकर दलितों के अधिकार का प्रतीकात्मक रूप से दावा किया।
• न्यायालय का फैसला:
25 दिसंबर 1937 को बॉम्बे उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि दलितों को तालाब के पानी का उपयोग करने का अधिकार है।
