नई दिल्ली। देश में नक्सल हिंसा से प्रभावित जिलों के वर्गीकरण की ताजा समीक्षा पाया गया कि अप्रैल में नौ राज्यों में इनकी संख्या 46 थी, जो अब घटकर 38 रह गई है। चिंताजनक जिलों की श्रेणी में अब केवल चार और सबसे अधिक प्रभावित जिलों की श्रेणी में महज तीन जिले रह गए हैं। यह समीक्षा वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए राष्ट्रीय नीति और कार्ययोजना 2015 के एक हिस्से के रूप में की गई, जिसके तहत केंद्र और राज्य सरकारें इस खतरे का मुकाबला करने के लिए मिलकर काम करती है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 15 अक्टूबर को यह ताजा वर्गीकरण अधिसूचित किया था।
केंद्र सरकार की घोषणा के बाद कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, मार्च 2026 तक नक्सलवाद का खात्मा करने की केंद्र सरकार की घोषणा के तहत सुरक्षा बलों की आक्रामक कार्रवाई के बाद इन सभी श्रेणियों में नक्सली हिंसा और प्रभाव के स्तर में गिरावट देखी गई है। ताजा वर्गीकरण के मुताबिक सबसे अधिक प्रभावित जिलों में केवल तीन जिले बचे हैं। जिनकी संख्या एक अप्रैल को छह थी। इन जिलों में छत्तीसगढ़ का बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा शामिल है।
यह नक्सल प्रभावित जिले हुए कम
चिंताजनक जिलों की श्रेणी में बचे जिलों में छत्तीसगढ़ का कांकेर, झारखंड का पश्चिमी सिंहभूम, मध्यप्रदेश का बालाघाट और महाराष्ट्र का गढ़चिरौली शामिल है। इस श्रेणी में उन जिलों का रखा जाता है, जहां नक्सली प्रभाव कम हो रहा है, लेकिन संसाधनों के केंद्रित विकास की अब भी आवश्वकता है। ताजा वर्गीकरण के मुताबिक, अन्य वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा, गरियाबंद और मोहला-मानपुर-अबागढ़ चौकी तथा ओडिशा
का कंधमाल शामिल है।
