भारतीय सेना में शामिल होगी जैवलिन मिसाइल , LOC-LAC में बढ़ेगी ताकत

भारतीय सेना में शामिल होगी जैवलिन मिसाइल , LOC-LAV में बढ़ेगी ताकत

नई दिल्ली। अमेरिका ने भारत को 818.4 करोड़ रुपए कीमत के एक्सकैलिबर गाइडेड आर्टिलरी प्रोजेक्टाइल और जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम बेचने की मंजूरी दे दी है। एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल और इसके उपकरणों की कीमत 414.48 करोड़ और जैवलिन मिसाइल सिस्टम और उपकरणों की कीमत करीब 402.16 करोड़ रुपए है। रूस से तेल खरीद की पैनल्टी के रूप में भारत पर लगाए गए 50 प्रतिश्त टैरिफ के बाद ये भारत की अमेरिका से पहली बड़ी रक्षा खरीद होगी। अमेरिका ने कहा है कि इस बिक्री से बड़े डिफेंस पार्टनर की सुरक्षा में सुधार होगा, जो दक्षिण एशिया क्षेत्र में राजनीतिक स्थितरता और शांति के लिए महत्वपूर्ण ताकत बना हुआ है।

डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी ने अमेरिकी संसद को बताया है कि भारत ने 216 एक्सकैलिबर टैक्टिल प्रोजक्टाइल और 10 एफजीएम-148 जैवलिन राउंड, एक जैवलिन एफजीएम-148 मिसाइल, फ्लाई टू बाय और 25 जैवलिन लाइटवेट कमांड लॉन्च यूनिट्स या जैवलिन ब्लॉक 1 कमांड लॉन्च यूनिट्स खरीदने की इच्छा जताई है। भारत को इन हथियारों और डिफेंस सिस्टम को सेना में शामिल करने में कोई मुश्किल नहीं होगी। साथ ही इन रक्षा उपकरणों और सपोर्ट सिस्टम की बिक्री से क्षेत्र में बुनियादी सैन्य संतुलन में कोई बदलाव नहीं आएगा। बात दें कि भारत और अमेरिका ने हाल ही में 10 साल के लिए डिफेंस पार्टनरशिप डील के विभिन्न मुद्दों पर समझौता किया है।

1 गोला 50 पारंपरिक गोलों के बराबर

यह जीपीएस-गाइडेड आर्टिलरी शेल है, जिसे हॉवित्जर जैसी बड़ी तोपों से फायर किया जाता है। पारंपरिक शेल के विपरीत, यह लंबी दूरी पर भी 2 मीटर से कम की सठीकता से निशाना लगा सकता है। एक एक्सकैलिबर राउंड 10-50 पारंपरिक राउंड के बराबर होता है। इससे गोला-बारूद बचता है। भारत पहले से एम 777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर के साथ एक्सकैलिबर का उपयोग कर रहा है, जो लद्दाख जैसे उच्च-उंच्चाई वाले क्षेत्रों में त्वरित तैनाती के लिए आदर्श हैं। अमेरिका से ताजा एक्सकैलिबर आर्टिलरी शेल खरीद से भारत की सटीकता के साथ हमला करने की क्षमता बढ़ेगी।

जैवलिन मिसाइल- टैंक तबाह करने में सक्षम

यह पोर्टेबल , कंधे से लॉन्च किया जाने वाला हथियार है। ये टैंक, बख्तरबंद गाड़ियों और किलेबंद जगहों को नष्ट कर सकता है। यह फायर-एंड-फॉरगेट गाइडेंस सिस्टम का इस्तेमाल करता है। सैनिक फायरिंग के तुरंत बाद सुरक्षित जगह पर जा सकता है। क्योंकि मिसाइल इंफ्रारेड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर खुद को गाइड करती है। इसे ले जाना आसान है, इसे दो सैनिक चला सकते हैं। यूक्रेन में सैकड़ों रूसी टैंक नष्ट किए। एलओसी और एलएसी के पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अहम। इसका टॉप अटैक मोड बख्तरबंद वाहनों और बंकरों के खिलाफ बेहद कारगर है।