नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में आने वाला खजुराहो अब सेंट्रल इंडिया में डिफेंस का सबसे बड़ा एयरबेस बनने वाला है। यहां इंडियन एयरफोर्स के फाइटर जेट के साथ सैन्य विमानों का बेड़ा होगा। एयरबेस के लिए 1000 एकड़ जमीन खजुराहो एयरपोर्ट के पास देख ली गई है। इंडियन एयरफोर्स की टीम ने प्रस्ताव बनाकर रक्षा मंत्रालय को भी दे दिया गया है। सहमति बनी तो अगले साल जमीन के अधिग्रहण की कार्यवाही शुरू हो सकती है। खजुराहो का चयन 4 स्थानों में से किया है।
एयरफोर्स की टीम ने इलाहाबाद, झांसी और ग्वालियर के साथ खजुराहो एयरपोर्ट को देखा। इसके बाद सुरक्षा के तमाम मापदंडों के मद्देनजर खजुराहो का चयन किया। सूत्रों की मानें तो आपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा मंत्रालय सेंट्रल इंडिया में किसी ऐसे स्थान की तलाश में था, जहां से सैन्य कार्रवाई को तुरंत अंजाम दिया जा सके। साथ ही वह दुश्मन की पहुंच से भी दूर हो।
पन्ना से सांसद वीडी शर्मा की इस संबंध में केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से बातचीत हुई है। शर्मा का कहना है कि रक्षामंत्री से सकारात्मक संकेत हैं। जल्द खजुराहो में यह काम शुरू होगा। एयरफोर्स को यह देखना है कि कितने गांव की जमीन आएंगी।
इन कारणों से हुआ खजुराहो का चयन
मिड-कॉरिडोर – प्रयागराज, झांसी और ग्वालियर में से चयन होना था, पर खजुराहो, झांसी और ग्वालियर एक सीध में हैं, जो उत्तर और दक्षिण भारत के बीच एक प्राकृतिक मिड-कॉरिडोर बनाते हैं। इससे किसी भी दिशा में एयर-ऑपरेशन और फोर्स मूवमेंट तेज और रणनीतिक रूप से आसान हो जाता है।
एक्शन जोन- पाकिस्तान सीमा से यह इलाका न बहुत पास है और न बहुत दूर, जिससे यहां हमलों की आशंका बहुत ही कम होगी। यह सुरक्षित और त्वरित-एक्शन जोन भी है। अगर किसी सीमा पर तैनाती या ऑपरेशन की जरूरत पड़े तो खजुराहो से विमान हर दिशाओं में पहुंच सकते हैं।
कम घनी आबादी – ग्वालियर और झांसी की तुलना में यह इलाका कम घनी आबादी वाला है। जिससे सुरक्षा-घेरा व रनवे विस्तार आसान है।
मौसम भी मुफिद – खजुराहो पठारी क्षेत्र में हैं। यहां सालभर मौसम स्थिर रहता है। न अधिक ऊंचाई हैस न धुंध और न ही तापमान की समस्या
