नई दिल्ली। देश में सड़क हादसों में लगातार हो रही मौतों को लेकर केंद्र सरकार ने चिंता जताई है। राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत तमें हर साल करीब 5 लाख सड़क हादसे होते हैं, जिनमें 1 लाख लोगों की मौत हो जाती है। इनमें से 66 प्रतिश्त मौतों 18 से लेकर 34 वर्ष के युवाओं को होती है।
बता दें कि कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी के सवाल पर नितिन गडकरी ने माना कि सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार और कानून सख्त करने के बाद भी सरकार मौतों की संख्या को कम करने में सफल नहीं हुई है। गडकरी ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों को आधुनिक एंबुलेंस देने की योजना बना रही है, लेकिन शर्त यह होगी कि एंबुलेंस 10 मिनट के अंदर हादसे वाली जगह पर पहुंच जाएं। आईआईएम के अध्ययन का हवाला देते हुए गडकरी ने कहा कि घटना के बाद समय पर इलाज मिलने से 50 हजार लोगों की जान को बचाया जा सकता है।
वहीं देश में राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण की रफ्तार पर उन्होंने बताया कि पिछले 5 सालों में स्वीकृत 574 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं तय समय से पीछे चल रही है। इन परियोजानाओं को बनाने में 3.60 लाख करोड़ रुपए लगे है। इन परियोजनाओं में से 300 एक साल से कम, 253 एक से तीन साल और 21 परियोजनाएं 3 साल से अधिक समय से विलंबित है। वहीं एक लाख करोड़ की लागत वाली 133 परियोजनाएं अब तक शुरू नहीं हो पाई है। इनमें भूमि अधिग्रहण, वन और वन्यजीव मंजूरी बाकी है।
2026 तक लागू होगी सैटेलाइट टोल प्रणाली
देश में टोल कलेक्शन व्यवस्था में बड़ा बदलाव होगा। गडकरी ने बताया कि 2026 के अंत तक पूरे देश में सैटेलाइट आधारित टोल कलेक्शन सिस्टम लागू कर दिया जाएगा। इस नई प्रणाली सैटेलाइट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित होगा। इसमें नंबर प्लेट पहचान तकनीक और फास्टैग का इस्तेमाल होगा। इसके जरिए वाहन 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से टोल प्लाजा पार के देंगे। बिना रुके टोल कट जाएगा। इस प्रणाली से ईंधन में करीब 1500 करोड़ रुपए की बचत होगी और सरकार के राजस्व में अतिरिक्त 6000 करोड़ की बढ़ोतरी होगी। उन्होंने बताया कि पहले मैनुअल टोल में 3 से 10 मिनट लगते थे, फास्टैग से यह समय घटकर 60 सेकंड हुआ और अब लक्ष्य इसे पूरी तरह शून्य करना है।
