अफ्रीका में जेन-जी का आंदोलन, 3 देशों की सरकारें बदलीं

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नई दिल्ली। एशिया के बांग्लादेश और नेपाल के बाद अब जेन-जी आंदोलन अफ्रीकी महाद्वीप में जोर पकड़ रहा है। बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और आर्थिक असमानता से त्रस्त यह युवा पीढ़ी अब केवल विरोध नहीं कर रही, वह सरकारें बदल रही है। पिछले एक साल में केन्या, मेडागास्कर, मोरक्को और बोत्सवाना जैसे देशों में जेन-जी के नेतृत्व में व्यापक प्रदर्शन
हुए। तीन देशों में राजनीतिक तख्तापलट या सत्ता परिवर्तन हुआ है।

मेडागास्कर में राष्ट्रपति हटे, मोरक्को में सेना ने हस्तक्षेप किया और केन्या में सरकार झुक गई। वहीं बोत्सवाना में युवाओं ने मतदान के जरिये 60 साल पुरानी सत्ता पलट दी। सोशल मीडिया से संगठित यह पीढ़ी अब लोकतंत्र, जवाबदेही और रोजगार की नई परिभाषा गढ़ रही है। फ्रस्टेड जेन-जी अब निर्णायक बन चुके हैं और इससे अफ्रीकी सियासतमें दहशत की लहर है।

टैक्स बिल में भड़के युवा

केन्या में राष्ट्रपति विलियम रूटो के वित्त विधेयक से टैक्स बढ़ने की आशंका थी। युवाओं ने कहा हम पहले ही टूट चुके हैं। सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह आंदोलन सड़कों पर आ गया। पुलिस फायरिंग में 60 से ज्यादा लोग मारे गए, संसद पर हमला हुआ, जिसके बाद राष्ट्रपति को यह बिल वापस लेना पड़ा।

मेडागास्कर में राष्ट्रपति देश से भागे


वहीं मेडागास्कर में बिजली-पानी की कमी और बढ़ती गरीबी ने युवाओं को भड़का दिया। प्रदर्शन राजधानी अंतानानारिवो से शुरु हुई, जिसमें सैकड़ों लोग घायल हो गए। इसके बाद संसद ने राष्ट्रपति एंड्री रजोएलिना पर महाभियोग लगाया और राष्ट्रपति भागे और सेना प्रमुख जनरल रिको रैनड्रिवेलो ने सत्ता संभाल ली।

खेल आयोजनों पर खर्च से भड़के युवा

मोरक्को सरकार ने 2030 विश्व कप और अफ्रीका कप की तैयारियों पर अरबों डॉलर खर्च किए, जिसके कारण युवाओं को शिक्षा और स्वास्थ्य नहीं मिला। ऐसे में जेन-जी के प्रदर्शन करने के बाद सरकार को पीछे हटना पड़ा और राजधानी साले और कैसाब्लांका में सेना ने नियंत्रण संभाल लिया। अब वहां नाम मात्र की सरकार रही।