टाटा ट्रस्ट्स में हुए बदलाव, श्रीनिवासन आजीवन रहेंगे सदस्य

टाटा ट्रस्ट्स में हुए बदलाव, श्रीनिवासन आजीवन रहेंगे सदस्य

नई दिल्ली। टाटा समूह की दिशा तय करने वाले टाटा ट्रस्ट्स के शासन में एक ऐतिहासिक बदलाव आया है। बीते साल 17 अक्टूबर 2024 को पारित एक निर्णायक प्रस्ताव के बाद ट्रस्टियों के कार्यकाल की सीमा हटा दी गई है। इसके चलते वेणु श्रीनिवासन को आजीवन ट्रस्टी नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल 23 अक्टूबर को खत्म हो रहा था। इस बदलाव के साथ ही मेहली मिस्त्री के भी आजीवन ट्रस्ट बननने का रास्ता साफ हो गया है, जिनका कार्यकाल 28 अक्टूबर को खत्म हो रहा है।

यह बदलाव टाटा ट्रस्ट के भीतर विभाजन की खरबों के बीच हुआ, जहां एक गुट नोएल टाटा के साथ जुड़ा हुआ है। एक सूत्र ने बताया कि टीवीएस समूह के मानद चैयरमैन श्रीनिवासन की नियुक्त सर्वसम्मति से हुआ है। टाटा ट्रस्ट की टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो 156 साल पुराने टाट समूह की होल्डिंग कंपनी है।

बता दें कि 17 अक्टूबर 2024 को ट्रस्ट्स ने एक नया नियम बनाया , जिसके तहत अब ट्रस्टियों को एक निश्चित समय के बाद हटना नहीं पड़ेगा। वे 75 साल तक उम्र तक या जब तक वे चाहें, बने रह सकते हैं। यह फैसला रतना टाटा के ट्रस्ट का नेतृत्व छोड़ने के बाद ट्रस्ट की निरंतरता और स्थिरता बनाए रखने के लिए लिया गया है। ट्रस्ट्स और टाटा संस को जोड़ते हुए एक केंद्रीकृत सरंचना बनाई है। इस कमेटी में नोएल टाटा, मेहली मिस्त्री, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह हैं। टाटा संस की शेयरधारिता और ट्रस्ट्स के परिचालन मामले पर प्रमुख निर्णय लेगी।