नई दिल्ली। पीएम मुद्रा योजना को अप्रैल 2015 में लॉन्च किया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सुक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को वित्तीय सहायता प्रदान कर आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करना और उद्यमशीलता को बढ़ावा, रोजगार सृजन एवं आर्थिक समावेशन को गति देना है।
विस्तार मार्च 2025 तक
पीएम मुद्रा योजना के अंतर्गत 33. 32 लाख करोड़ रुपए का वितरण किया जा चुका है। इसमें 52.73 करोड़ ऋण खाते खोले गए है। योजना से भारत में सूक्ष्म उद्यमिता की जमीनी संस्कृतिक को मजबूती मिली है।
पीएम मुद्रा योजना की सरंचना
पीएम मुद्रा योजना के अंतर्गत शिशु लोन में 50 हजार, किशोर में 50 हजार से 5 लाख, तरुण में 5 लाख से 10 लाख और तरुण प्लस में 10 लाख से 20 लाख तक का लोन दिया जाता है। इसमें संपाश्विक मुक्त लोन, प्रतिस्पर्धी ब्याज दरें, लचीनी पुनर्भुगतान व्यवसथा, डिजिटल आवेदन प्रक्रिया, और निजी और सरकारी बैंकों की विस्तृत भागदारी भी सुनूश्चित की जाती है, जिसके कारण यह योजना काफी लोकप्रिय है।
परिवर्तनकारी प्रभाव
योजना के अंतर्गत 10.97 करोड़ नए खाते खोले गए है। वहीं इसमें महिला उद्यमियों को 14.85 लाख करोड़, एसी, एसटी और ओबीसी लाभार्थियों को 11.72 लाख करोड़
रुपए दिए गए है। योजना में स्वरोजगार और ग्रामीण सशक्तिकरण को प्रोत्साहन स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को प्रोत्साहन, गिनी सूचकांक में -0.84 का नकारात्मक
सहसंबंध पीएमएमवाई वितरण और गरीबी में कमी के बीच 0.44 का सहसंबंध को बढ़ावा दिया गया है।
चुनौतियां
इस योजना का अभी भी पूर्वोत्तर राज्यों और अधिक जनसंख्या वाले घनत्व राज्यों में पहुंच नहीं है। योजना के अंतर्गत वित्तीय साक्षरता एवं जागरूकता और जिम्मेदार उधारी बढ़ाने हेतु लक्षित अभियान आवश्यक है।
