विदेश सचिव विक्रम मिस्री की थिम्पू यात्रा के दौरान भारत और भूटान के बीच द्विपक्षीय सहयोग को नई गति देते हुए 332 करोड़ रुपये की 12 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूटान और भारतीय एग्जिम बैंक (Export-Import Bank of India) के बीच 4,000 करोड़ रुपये के लोन समझौते पर हस्ताक्षर हुए।
दो दिवसीय यात्रा के दौरान मिस्री ने भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक, प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे और विदेश तथा विदेश व्यापार मंत्री ल्योंपो डी.एन. धुंग्येल से भी मुलाकात की। यह यात्रा मिस्री की 27-28 जुलाई को हुई चीन यात्रा के तुरंत बाद हुई है, ऐसे समय में जब नई दिल्ली और बीजिंग सीमा से जुड़े मुद्दों और व्यापक सहयोग को लेकर संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
पांचवां भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता
गुरुवार को हुई पांचवीं भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता की सह-अध्यक्षता मिस्री और उनके भूटानी समकक्ष दाशो पेमा लेकतुप दोरजी ने की। इस वार्ता का मुख्य फोकस भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर रहा। इस दौरान दोनों पक्षों ने विकास साझेदारी, ऊर्जा, व्यापार और निवेश, कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की।
10,000 करोड़ की सहायता की समीक्षा
बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024-29) के लिए भारत द्वारा दी जा रही 10,000 करोड़ रुपये की सहायता की समग्र प्रगति और क्रियान्वयन की समीक्षा की। इस दौरान स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शहरी सुविधाओं और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों से जुड़ी कुल 12 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनकी कुल लागत 332 करोड़ रुपये है।
पार्क और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग
दोनों देशों के विदेश सचिवों ने वर्चुअल माध्यम से थिम्पू इकोलॉजिकल पार्क और ओलाखा पार्क का उद्घाटन भी किया। ये दोनों परियोजनाएं थिम्पू में हरित अवसंरचना और खुले स्थानों के विकास कार्यक्रम के तहत भारत की सहायता से विकसित की गई हैं, जो द्विपक्षीय आर्थिक विकास पहल का हिस्सा है।
इसके अलावा, स्वास्थ्य शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग के लिए एम्स (AIIMS) और भूटान के खेसर ग्यालपो यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के बीच भी एक समझौता हुआ।
भूटान की हरित गतिशीलता (ग्रीन मोबिलिटी) पहल के समर्थन में भारत ने भूटान की शाही सरकार को 45 इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) भी सौंपे।
